देहरादून, स्कूल आफ मैनेजमेंट, दून विश्वविद्यालय द्वारा रिसर्च मैथोडोलोजी पर आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के पांचवे दिन प्रथम सत्र में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के डा0 पुनीत भूषण ने सांख्यकीय विश्लेषण विधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्लेषण से पूर्व आंकड़ो की पहचान करना आवश्यक है। गु्रप डाटा विश्लेषण के लिये कलस्टर तकनीक सर्वाेत्तम मानी जाती है। उन्होंने कलस्टर एनालिसिस के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। आंकड़े एकत्र होने के उपरान्त उनकी प्रकृति के अनुसार सांख्यकीय विश्लेषण विधि अपनायी जानी चाहिए। उन्होंने फैक्टर एनालिसिस विधियों पर भी शोधार्थियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला शोधार्थियों को शोध प्रविधि एवं विश्लेषण तकनीक के व्यवहारिक प्रशिक्षण के लिये काफी उपयोगी एवं कारगर सिद्व होगी।
द्वितीय सत्र में विश्वविद्यालय, ़ डाॅ0 नित्यानन्द हिमालयन शोध एवं अघ्ययन केन्द्र के भूगोल विभाग के प्रो0 डी0डी0 चैनियाल ने कहा कि शोधार्थियों को शोध का विषय चयन करते समय विषय वस्तु का अध्ययन कर सामाजिक महत्व के विषय अपनाने चाहिए जिससे शोध के परिणामों से समाज एवं राष्ट्र का विकास हो सके। प्रो0 चैनियाल ने उत्तराखण्ड के सन्दर्भ में पलायन जैसे विषय पर शोध एवं अध्ययन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रबन्धशास्त्र स्कूल के विभागाध्यक्ष प्रो0 एच0सी0 पुरोहित ने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध छात्रों को उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण मिल सके इस दिशा में यह कार्यशाला कारगर सिद्व होगी। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 प्राची पाठक ने किया। इस अवसर पर डाॅ0 सुधांशु जोशी, श्री नरेन्द्र लाल, फरीदा, प्रियंका, एश्वर्य प्रताप, मुकुल देव, मनुष्वी, मनोज, सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थी उपस्थित रहे।
शोध प्रविधि विश्लेषण तकनीक व्यवहारिक होः डाॅ0 पुनीत